- टीईटी अनिवार्यता के समाधान की दिशा में सरकार सक्रिय, शिक्षक संगठनों से वार्ता कर तैयार होगा प्रस्ताव
देहरादून, 15 जून। उत्तराखंड में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर कार्यरत हजारों शिक्षकों से जुड़े टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्यता के मुद्दे के समाधान की दिशा में सरकार ने पहल तेज कर दी है। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों को शिक्षक संगठनों के साथ वार्ता कर सुसंगत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अन्य राज्यों में टीईटी को लेकर शिक्षकों के हित में लिए गए निर्णयों और व्यवस्थाओं का अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा गया है।
सोमवार को शिक्षा निदेशालय स्थित सभागार में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक में डॉ. रावत ने कहा कि कक्षा एक से आठ तक अध्ययनरत विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले लगभग 20 हजार शिक्षकों से जुड़ा यह महत्वपूर्ण विषय है, जिस पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को सभी पक्षों से चर्चा कर व्यवहारिक समाधान तैयार करने के निर्देश दिए।
बैठक में शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। शिक्षा मंत्री ने कहा कि उच्च न्यायालय में लंबित पदोन्नति संबंधी प्रकरणों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षकों को शीघ्र पदोन्नति का लाभ मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
डॉ. रावत ने आगामी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) में राज्य की स्थिति को और बेहतर बनाने के लिए अभी से तैयारी शुरू करने को कहा। उन्होंने लर्निंग आउटकम, शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण, गवर्नेंस प्रोसेसेज और अन्य महत्वपूर्ण मानकों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही राज्य एवं जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित करने को भी कहा।
उन्होंने प्रत्येक विद्यार्थी की कम से कम तीन विभिन्न गतिविधियों में सहभागिता सुनिश्चित करने, प्रदेश को शत-प्रतिशत साक्षरता की दिशा में आगे बढ़ाने तथा 30 जून तक विभिन्न संवर्गों के सभी सम्बद्धीकरण (अटैचमेंट) समाप्त करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए
बैठक में निदेशक एससीईआरटी वंदना गब्र्याल, प्रभारी निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल सती, अपर निदेशक विद्यालयी शिक्षा के.एस. रावत, रविन्द्र काला सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।










