वरिष्ठ पत्रकार डॉ॰ कमलकांत बुधकर का निधन,कनखल श्मशान में होगा अंतिम संस्कार

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वरिष्ठ पत्रकार डॉ॰ कमलकांत बुधकर का निधन

Haridwar : हरिद्वार के वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार कमलकांत बुधकर का आज सुबह हरिद्वार में लम्बी बीमारी के चलते निधन हो गया है।

कमलकांत बुधकर वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्कार थे,

डॉ॰ कमलकांत बुधकर प्रेस क्लब हरिद्वार के संस्थापक महासचिव थे।

कौन थे डॉ॰ कमलकांत बुधकर :

19 जनवरी 1950 को हरिद्वार में डॉ॰ कमलकांत बुधकर का जन्म हुआ हुआ था।

मराठी भाषी डॉ॰ कमलकांत बुधकर शिक्षक के रूप में 1972 से ही विभिन्न स्नातक महाविद्यालयों में हिन्दी प्राध्यापक रहे।

1990 से गुरुकुल काँगड़ी वि.वि. में हिन्दी पत्रकारिता के प्राध्यापक के रूप में कार्य किया।

पत्रकार के रूप में पिछले 28 वर्षों से विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएं प्रकाशित होती रही हैं।

लालकिले के राष्ट्रीय कवि सम्मेलन और गणतंत्रा दिवस पर होने वाले राष्ट्रीय सर्वभाषा कवि.सम्मेलन सहित पचासों कविसम्मेलनों में भाग लिया और संयोजन संचालन किया है।

नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, जनसत्ता, राजस्थान पत्रिका, आज, राष्ट्रीय सहारा, हिन्दी ब्लिट्स और हिन्दी करंट, संडे आब्जर्वर, संडे मेल आदि में सैकड़ों लेख, शोधलेख, फीचर्स, रिपोर्टिंग्स आदि प्रकाशित हुई है।

हरिद्वार सहित अनेक नगरों के स्थानीय समाचार पत्रों मे भी लेख और रिपोर्टस का प्रकाशन मराठी से अनेक श्रेष्ठ कविताओं का हिन्दी में अनुवाद किया जो प्रकाशित भी हुआ।

साथ ही हरिद्वार के पण्डों, घाटों, हरिद्वार के कुम्भ अर्द्धकुम्भ, देवबन्द के दारूल उलूम आदि से सम्बद्ध फीचर देशभर में चर्चा का विषय बने।

डॉ॰ कमलकांत बुधकर को  तरुण संघ देहरादून द्वारा ` तरुणश्री´ की उपाधि से सम्मानित किया गया है ।

सहारनपुर की ` प्रतिबिम्ब´, हरिद्वार की `जैन मिलन´ और गंगोह, हरिद्वार आदि की संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है ।

प्रभु प्रेमी संघ अम्बाला द्वारा 1995 का ज्ञानभारती सम्मान।

सुधांशु संस्था द्वारा `सद्ज्ञान सम्मान´ तथा 2007 में अयोध्‍या में श्री रामकिंकर सम्‍मान किया गया

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया शोक व्यक्त :

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार कमलकांत बुधकर के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति एवं शोक संतिप्त परिजनों को धैर्य प्रदान करने की कामना की है।

मुख्यमंत्री ने कमलकांत बुधकर के निधन को पत्रकारिता एवं

साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

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