लंढौरा: चमन लाल महाविद्यालय में जंतु विज्ञान विभाग एवं वाणिज्य विभाग ने संयुक्त रूप से उत्तराखंड वैज्ञानिक एवं तकनीकी परिषद के सहयोग से बौद्धिक संपदा अधिकार कानून विशेष रुप से पेटेंट एवं कॉपीराइट को लेकर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने बौद्धिक संपदा अधिकार एवं पेटेंट तथा कॉपीराइट के विषय में विस्तार से इसकी प्रक्रिया तथा महत्व के विषय में जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के डॉक्टर एस एस कुंजवाल ने बौद्धिक संपदा, पेटेंट तथा कॉपीराइट का अर्थ स्पष्ट करते हुए इनके बीच अंतर को समझाया। उन्होंने पेटेंट फाइल करने की प्रक्रिया और तकनीक पर विशेष रुप से बात की।
विशिष्ट वक्ता गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के डॉ विपिन शर्मा ने पेटेंट के बारे में विस्तार से बताते हुए उसकी प्रक्रिया इतिहास और लाभ को समझाया उन्होंने विशेष रूप से दवाइयों के पेटेंट के विषय में चर्चा की उन्होंने बताया कि पेटेंट किसी व्यक्ति द्वारा खोजी गई किसी चीज पर उसके अधिकारों की रक्षा करता है।
इसके लिए आवश्यक है कि आपको पेटेंट संबंधी सभी जानकारी हो तभी हम पेटेंट का लाभ उठा सकते हैं। एसजीआरआर कॉलेज से आए डॉ मनीष देव शर्मा ने कॉपीराइट्स के विषय में बात करते हुए कहा कि ज्यादातर लोग सोचते हैं कि बौद्धिक संपदा अधिकार विज्ञान विषयों से ही संबंधित है जबकि यह इन्नोवेशन को बचाने का काम करता है।
सिद्धार्थ लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ शराफत अली ने भारत में कॉपीराइट कानूनों के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कॉपीराइट कानून की अवहेलना से कौन-कौन से कानूनी दंडों का प्रावधान है।
महाविद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष राम कुमार शर्मा ने कहा कि आज के दौर में हम सभी को कॉपीराइट कानूनों बौद्धिक संपदा कानूनों ट्रेडमार्क आदि के विषय में जानकारी होना जरूरी है।
महाविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग एवं वाणिज्य विभाग का यह संयुक्त प्रयास निश्चित रूप से इस दिशा में हमारा मार्गदर्शन करेगा।
प्राचार्य डॉ सुशील उपाध्याय हुए विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि भारत जैसे देश में अभी अध्यक्ष संपदा कॉपीराइट्स के क्षेत्र में जानकारी फैलाना बहुत आवश्यक है। और इस क्षेत्र में उच्च शिक्षण संस्थान अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इससे पूर्व संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में आयोजन सचिव डॉक्टर देव पाल ने संगोष्ठी का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स लॉ के विषय में बताया।
संगोष्ठी के संयोजक डॉ दीपिका सैनी ने आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस अवसर पर देश भर से आए शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
डॉ किरण शर्मा, डॉ हिमांशु कुमार, डॉ धर्मेंद्र कुमार, डॉ सूर्यकांत , डा. निशु भाटी आदि का विशेष सहयोग रहा।